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निराकार ज्योतिर्बिंदु स्वरूप शिव के धरती पर अवतरण के दिवस को महाशिवरात्रि कहा जाता है।- ब्र.कु. मधु दीदी

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पचोर। ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र के परमात्मा – अनुभूति भवन में महाशिवरात्रि पर्व मनाया गया, जिसमें हनुमान प्रसाद गर्ग पूर्व संसदीय सचिव, शिव कुमार शर्मा सेवानिवृत कृषि अधिकारी, कपिल गुप्ता, ट्रेनिंग ऑफिसर आई.टी. आई, ब्रह्माकुमारी मधु दीदी,सीताराम लहरी एवं पत्रकार बंधु सम्मिलित हुए।


परमात्मा शिव के ध्यान और दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम में सभी अतिथियों एवं पत्रकारों ने अपने शुभकामनाएं प्रेषित की तथा संस्था द्वारा समाज कल्याण के कार्य को साराहा।


वहीं ब्रह्माकुमारी मधु दीदी ने दुर्व्यसनों से दूर रहने, तथा सभी लोगों से समाज में अपना योगदान देने की बात कही, उन्होंने परमात्मा को निराकार बताते हुए कहा कि मंदिरों में सभी देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा होती है लेकिन शिव का अवतरण होता है अर्थात वहां स्वयं प्रकट होते हैं उनका ना जन्म हुआ है ना मृत्यु होती है, इसलिए उनको शिव शंभू कहा जाता है। उन्होंने आगे कहा कि बुराई के प्रतीक माने जाने वाली चीज धतूरा ,अक,बैर चढ़ाने से परमात्मा शिव प्रसन्न नहीं होते हैं लेकिन मनुष्य के अंदर काम, क्रोध, लोभ ,मोह अहंकार रूपी बुराई को शिव के ऊपर अर्पण करने से ही शिव प्रसन्न होंते हैं, इसलिए श्रेष्ठ कर्म करें उसके लिए परमात्मा शिव से योग होना अति आवश्यक है। ब्रह्माकुमारीज परिवार मनुष्य को देव बनाने का उत्कृष्ठ कार्य कर रही हैं, क्योंकि यहां समय सृष्टि परिवर्तन का है नए युग का शुभारंभ हम सभी अपनी बुराइयों को त्याग कर करें तथा नैतिक मूल्य धारण करके समाज को नई दिशा देवें। वास्तव में देखा जाए तो हम सब राम कृष्ण के वंशज है इसलिए हम सब देवी देवताओं को पूजते हैं, हमारे अंदर देवत्व का भाव है बस उसे राजयोग ध्यान के द्वारा जागृत किया जा सकता है जो संस्था द्वारा निशुल्क सिखाया जाता है।


कपिल गुप्ता ने बताया कि इस संस्था से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला बहनों से अपनापन तथा सच्ची शांति की अनुभूति मैंने यहां आकर ही की है।
कार्यक्रम के अंतर्गत नन्हे मुन्ने बच्चों ने नृत्य प्रस्तुत किया, ब्रह्माकुमारी मोनिका दीदी ने राजयोग ध्यान और प्रतिज्ञा कराई, वही ब्रह्माकुमारी वैशाली दीदी ने सबका आभार माना मंच का सफल संचालन गिरिराज पाटीदार ने किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों को भेंट स्वरूप में सुविचार के प्रतीक चिन्ह दिए गए तथा प्रसादी वितरित की गई।

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